नवंबर में बढ़ सकती है बारिश! गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों के लिए IMD का अहम पूर्वानुमान

नवंबर में बढ़ सकती है बारिश! गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों के लिए IMD का अहम पूर्वानुमान
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लेखक: sanchit ramdas shinde

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नवंबर में बढ़ सकती है बारिश! गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों के लिए IMD का अहम पूर्वानुमान

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने नवंबर महीने के दौरान मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई है। नवंबर गेहूं की बुवाई का महत्वपूर्ण समय होता है। ऐसे में मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान किसानों के लिए राहत भरा हो सकता है।

हालांकि, देश के अधिकांश हिस्सों में नवंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना भी जताई गई है।

किन राज्यों में हो सकती है अच्छी बारिश?

IMD के अनुसार, मध्य भारत के मध्य प्रदेश और उससे सटे महाराष्ट्र तथा गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है।

वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, इन क्षेत्रों में गेहूं की खेती का बड़ा हिस्सा सिंचाई पर निर्भर है, इसलिए कम बारिश का असर सीमित रह सकता है।

नवंबर में गेहूं की बुवाई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मौसम?

नवंबर में किसान रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई करते हैं। इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होना खेत की तैयारी और बुवाई के लिए उपयोगी हो सकता है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना से किसानों को खेत की नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बुवाई का निर्णय स्थानीय मौसम, मिट्टी की स्थिति और खेत में उपलब्ध नमी को देखकर ही लेना चाहिए।

देश में कुल बारिश का क्या अनुमान है?

IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा के अनुसार, नवंबर में देशभर में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) 29.7 मिमी के 77 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है। देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, जबकि मध्य, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

  • गेहूं की बुवाई से पहले खेत में नमी की स्थिति जांचें।

  • स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार खेत की तैयारी करें।

  • बारिश की संभावना को ध्यान में रखकर सिंचाई की योजना बनाएं।

  • अपने जिले के मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखें।

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